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पं० श्रीराम शर्मा की विचार क्रांतिः एक सैद्धान्तिक विवेचन (स्वतंत्रता के बाद भारतीय सांस्कृतिक चेतना के संदर्भ में)

Research articleOpen accessVol. 15, Issue 3, February 2026

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डा० सचिन कुमार (2026). पं० श्रीराम शर्मा की विचार क्रांतिः एक सैद्धान्तिक विवेचन (स्वतंत्रता के बाद भारतीय सांस्कृतिक चेतना के संदर्भ में). International Journal for Research in Education, 15(3), 5-9. https://doi.org/10.63345/ijre.v15.i3.2

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डा० सचिन कुमार

एसोसिएट प्रोफेसर (इतिहास)

डी.ए.वी. कॉलेज, मुजफ्फरनगर (उ.प्र.), भारत

सार
स्वतंत्रता के उपरांत भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल राजनीतिक व्यवस्था का संचालन नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों तथा नैतिक दृष्टि का पुनर्गठन भी था। औपनिवेशिक मानसिकता, भौतिकतावादी विकास मॉडल और सामाजिक विघटन ने भारतीय समाज को वैचारिक संकट की स्थिति में पहुँचा दिया था। इस वैचारिक संकट से निकालने में पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्रतिपादित विचार क्रांति की अवधारणा एक गहन सैद्धांतिक समाधान प्रस्तुत करती है। इस शोध पत्र के माध्यम से स्वतंत्रता के बाद भारतीय सांस्कृतिक चेतना के परिप्रेक्ष्य में विचार क्रांति को एक चेतना-आधारित परिवर्तन प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शोध पत्र में यह भी स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि आचार्य श्रीराम शर्मा की विचार क्रांति व्यक्ति के अंतःकरण से प्रारम्भ होकर समाज और राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनर्निर्माण तक विस्तृत होती है।

बीज शब्द: विचार क्रांति, स्वतंत्रता, पं० श्रीराम शर्मा आचार्य, नैतिक मूल्य

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डा० सचिन कुमार (2026). पं० श्रीराम शर्मा की विचार क्रांतिः एक सैद्धान्तिक विवेचन (स्वतंत्रता के बाद भारतीय सांस्कृतिक चेतना के संदर्भ में). International Journal for Research in Education, 15(3), 5-9. https://doi.org/10.63345/ijre.v15.i3.2

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