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डॉ. पंकज ए. श्रीवास्तव
निदेशक,
एस.डी. विज्ञान महाविद्यालय
ऑर्सिड आईडी: https://orcid.org/0009-0006-8029-8725
सारांश : भारत में तीव्र शहरीकरण, डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग, बदलती खाद्य संस्कृति, परिवहन के मोटरीकरण तथा शिक्षा और रोजगार की बदलती प्रकृति ने युवाओं की दैनिक जीवनशैली को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। युवा अवस्था स्वास्थ्य व्यवहारों के निर्माण और स्थायित्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इस अवधि में विकसित आहार, शारीरिक सक्रियता, नींद, स्क्रीन-उपयोग और नशीले पदार्थों से संबंधित व्यवहार आगे के जीवन में भी बने रह सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार किशोरावस्था और युवा अवस्था में खराब आहार, कम शारीरिक सक्रियता और अन्य जोखिमपूर्ण व्यवहार भविष्य के गैर-संचारी रोगों के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य शहरी युवाओं में जीवनशैली तथा स्वास्थ्य व्यवहारों में उभरती प्रवृत्तियों का अध्ययन करना है। अध्ययन में 18–29 वर्ष आयु के 480 शहरी युवाओं को शामिल किया गया। आहार व्यवहार, शारीरिक सक्रियता, दैनिक स्क्रीन समय, नींद की अवधि, तनाव-प्रबंधन, तंबाकू/मद्यपान व्यवहार तथा स्व-रिपोर्टेड स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया गया। प्राप्त विश्लेषण में 58.3% प्रतिभागियों ने प्रतिदिन कम-से-कम तीन घंटे गैर-शैक्षणिक स्क्रीन गतिविधियों में बिताने की सूचना दी, जबकि 46.9% प्रतिभागी सप्ताह में 150 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाली शारीरिक सक्रियता के स्तर तक नहीं पहुँच रहे थे। लगभग 41.7% प्रतिभागियों ने सप्ताह में कम-से-कम तीन बार बाहर का/अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन लेने की सूचना दी और 38.1% ने प्रतिदिन सात घंटे से कम नींद बताई। बहुविकल्पीय प्रतिगमन विश्लेषण में उच्च स्क्रीन समय, कम शारीरिक सक्रियता और अनियमित भोजन व्यवहार निम्न स्वास्थ्य-व्यवहार स्कोर से महत्वपूर्ण रूप से संबंधित पाए गए। निष्कर्ष बताते हैं कि शहरी युवाओं के स्वास्थ्य को केवल व्यक्तिगत विकल्प के रूप में नहीं बल्कि डिजिटल वातावरण, खाद्य पर्यावरण, सामाजिक दबाव और निर्मित शहरी परिवेश के संयुक्त प्रभाव के रूप में समझने की आवश्यकता है।
मुख्य शब्द: शहरीकरण, युवा, जीवनशैली, स्वास्थ्य व्यवहार, शारीरिक सक्रियता, स्क्रीन समय, आहार व्यवहार, नींद, मानसिक स्वास्थ्य, भारत
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