Research articleOpen accessVol. 12, Issue 3, March 2023
- Received
- 6 January 2023
- Accepted
- 9 February 2023
- Published
- 14 March 2023
- Licence
- CC BY 4.0
How to cite
डॉ. विद्या चरण (2023). हिन्दी के नवजागरणकालीन साहित्य में चित्रित दलित जीवन: उपन्यासों के विशेष संदर्भ में. International Journal for Research in Education, 12(3). https://doi.org/10.63345/ijre.v12.i3.1
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डॉ. विद्या चरण
असिस्टेंट प्रोफेसर – हिंदी
राजकीय महाविद्यालय बक्खा खेड़ा, उन्नाव
हिन्दी के नवजागरणकालीन साहित्य में दलित और अछूतों की समस्या प्रमुखता से नहीं आयी है। ‘स्वामी अछूतानन्द’ को छोड़कर कोई दलित नेता आगे आते नहीं दिखाई पड़ते। फिर भी भारतेन्दु मंडल के कुछ साहित्यकारों में जाति और वर्ण-व्यवस्था की संकीर्णता के विरुद्ध मुखर चेतना दिखाई पड़ती है, किन्तु यह मुखर चेतना भारतेन्दु युग के उपन्यासों में बहुत कम व्यक्त हुई है। अधिकांशतः कविता, निबन्ध और नाटकों में व्यक्त हुई है। बीसवीं शताब्दी तक आते-आते दलित जागरण को साहित्य में व्यापक स्थान मिला।
हिन्दी साहित्य में नवजागरण भारतेन्दु के आगमन से माना जाता है। भारतेन्दु ने एक तरफ हिन्दी खड़ी बोली को गद्य-पद्य की भाषा के रूप में प्रतिस्थापित करने की पैरवी की तो दूसरी ओर साहित्य को व्यापक सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की कोशिश की। इस कोशिश का परिणाम यह हुआ कि राष्ट्रीयता, सामाजिकता आदि से जुड़े हुए मुद्दे साहित्य की विभिन्न विधाओं, खासकर कविता और निबन्ध में जगह प्राप्त करने लगे। लेकिन दलित और जाति संबंधी मुद्दे सिर्फ सहानुभूति तक सीमित थे। उपन्यासों में दलित और निम्न जातियों के प्रसंग मुख्य रूप से नहीं बल्कि आनुषंगिक या अवान्तर रूप में आये हैं। जो अवान्तर प्रसंग हैं उनमें विमर्श या दलित क्रान्ति जैसे विचार का अत्यन्त अभाव है। सिर्फ सहानुभूति और एक सामाजिक समस्या के रूप में दलित या निम्न जातियों के प्रसंग आये हैं।
संदर्भ :
- मिश्र, शिवकुमार : दलित साहित्य का आंदोलन और हिन्दी क्षेत्र, नया पथ, अंक 24–25, 1997
- नामवर सिंह : हिन्दी नवजागरण की समस्याएँ, अक्टूबर–दिसम्बर, 1983
- कँवल भारती : दलित विमर्श की भूमिका
- जोतिबा फुले : गुलामगिरी
- भारतेन्दु ग्रंथावली, भारत दुर्दशा
- प्रेमधन सर्वस्व
- हेमन्त शर्मा : भारतेन्दु समग्र (मेहदावल यात्रा)
- प्रो. गोपाल राय : हिन्दी उपन्यासों का इतिहास
- मधुरेश : हिन्दी उपन्यास का विकास
How to cite
डॉ. विद्या चरण (2023). हिन्दी के नवजागरणकालीन साहित्य में चित्रित दलित जीवन: उपन्यासों के विशेष संदर्भ में. International Journal for Research in Education, 12(3). https://doi.org/10.63345/ijre.v12.i3.1
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